6 जनवरी 2013, छात्रावास – 5, क्रिकेट मैदान, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर
रविवार की रात छात्रावास 5 के क्रिकेट मैदान में आयोजित छात्रावास दिवस “दबायन – 2013″ में खाना समय पे ना मिलने के कारण प्रथम वर्ष के एक छात्र की मौत हो गयी। यह छात्र नियमित रूप से 7:30 बजे मे “मैस” खुलने पर खाना खाने का आदी था। छात्रावास अकार्यकारी समिति (HEC) के कुप्रबंध से अनजान वह 8:30 बजे तक वहा खाना शुरू होने का इंतज़ार करता रहा। कुछ समय बाद HEC के एक लापरवाह सदस्य ने उसे ये कहकर भगा दिया कि पहले प्राध्यापक खाना खायेंगे। 9:30 बजे तक खाना न मिलने पर उस छात्र ने वही पर काफी देर तड़पने के बाद दम तोड़ दिया।
हमें अपने विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि यहाँ के असंवेदनशील छात्रों ने शव को बॉनफायर में डाल दिया और हाथ सेकने लगे। हमारे पत्रकार ने कई अन्य घटनाओं का भी खुलासा किया। 100 लोगों की लंबी कतार में ठंड में खड़े दो तृतीय वर्ष के छात्रों को चक्कर आ गए, वो अभी स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती हैं। D-Mid के एक छात्र ने अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पे हमें बताया, “खाने की लाइन बहुत बड़ी थी। कुछ भूतपूर्व HEC सदस्य तथा उनके कुछ प्रभावशाली मित्र अवैध तरीके से कतार में धक्का-मुक्की करके घुस गए। मैं रात के 12 बजे तक लाइन में खड़ा रहा। खाना भी ख़त्म हो गया था। अंत में परेशान होकर मैंने दो-चार कालेजुलुम खाके पेट भर लिया।” इसके बारे में जब मैस के राजा चुलदीप कुमार से पूछा गया तो उन्होंने हसके कहा, “का बात कर रहे हो!” इतना ही नहीं, DOSA के नियमों को आड़े-हाथ लेते हुए इच-गार्ड ने रात में 12 बजे के बाद भी कन्याओं को छात्रावास से बाहर नहीं निकाला।
घटना के अगले दिन छात्रों ने एक नैनो-सेकेंड का मौन रखके अपने मित्र को श्रद्धांजलि दी। बराक ओसामा एवं मनमोहक सिंह ने इस घटना की घनघोर निंदा की है।
** ये समाचार पूर्णतः काल्पनिक है। इसका किसी भी वास्तविक घटना से कोई सबंध नहीं है। अगर किसी भी घटना से किसी भी तरह से इसकी समानता होती हो तो उसे मात्र एक सयोंग कहा जायेगा।
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